रिपोर्ट में 'दोष' शब्द देखकर डर लग सकता है। दूसरी ओर, बहुत सारे अच्छे योग देखकर यह लग सकता है कि बड़ी सफलता पक्की है। दोनों ही बातें अधूरी हैं। योग या दोष का नाम केवल जाँच की शुरुआत है, अंतिम फैसला नहीं।
योग का मतलब क्या है
योग ग्रहों, भावों या उनके स्वामियों के किसी तय संबंध को कहते हैं। पहले देखना होता है कि योग का पूरा नियम बन रहा है या नहीं। फिर यह देखा जाता है कि उसके ग्रह मजबूत हैं या कमज़ोर, उन पर मुश्किल असर है या नहीं और उनकी दशा कब चलेगी।
एक जरूरी बात: पंचांग में भी 'योग' शब्द आता है। पंचांग का योग और जन्मकुंडली का ग्रह-योग अलग चीज़ें हैं।
दोष में नियम के साथ अपवाद भी देखें
दोष किसी कठिन ग्रह-स्थिति का पारंपरिक नाम है। केवल 'दोष है' लिख देना पूरा उत्तर नहीं है। यह भी बताना चाहिए कि दोष किस आधार से देखा गया, उसकी सभी शर्तें पूरी हैं या नहीं, कोई भंग या राहत का नियम है या नहीं और वह किस समय असर दे सकता है।
मंगल दोष एक आसान yes या no नहीं है
मंगल दोष को आम तौर पर लग्न से और कई परंपराओं में चंद्रमा व शुक्र से भी देखा जाता है। मंगल किस भाव और राशि में है, किन भावों का स्वामी है, उस पर किसकी दृष्टि है और दूसरे व्यक्ति की कुंडली कैसी है—ये सब बातों से नतीजा बदल सकता है। केवल Manglik label से शादी का फैसला नहीं होना चाहिए।
साढ़ेसाती जन्म का दोष नहीं है
जब शनि चंद्र राशि से पहले वाली राशि, चंद्र राशि और उसके बाद वाली राशि से गुजरता है, उसे साढ़ेसाती कहते हैं। यह लगभग साढ़े सात साल का गोचर है और इसके तीन हिस्से होते हैं।
यह समय हर व्यक्ति के लिए एक जैसा बुरा नहीं होता। जन्मकुंडली में शनि कैसा है, चंद्रमा की स्थिति क्या है, कौन-सी दशा चल रही है और बाकी गोचर क्या कह रहे हैं—इन सबको साथ देखना पड़ता है।
राहु और केतु को भी अकेले न पढ़ें
राहु और केतु असली भौतिक ग्रह नहीं, चंद्रमा की कक्षा के दो बिंदु हैं। उनका फल उस राशि के स्वामी, साथ बैठे ग्रह, दृष्टि और दशा से बहुत बदलता है। इसलिए उनके नाम पर लिखी डरावनी लाइन को सीधे सच न मानें।
किसी भी योग या दोष पर पाँच सवाल
- क्या इसका पूरा नियम सच में बन रहा है?
- क्या जुड़े ग्रहों में फल देने की ताकत है?
- क्या कोई अपवाद, भंग या उलटा असर भी है?
- यह आपकी कुंडली में किन भावों और जीवन के किस हिस्से से जुड़ता है?
- क्या उसकी दशा या गोचर अभी चल रहा है?
उपाय और रत्न कहाँ काम आते हैं
उपाय पूजा, दान या किसी अच्छी आदत के रूप में बताए जा सकते हैं। वे अपनी इच्छा से किए जाने चाहिए। उन्हें पक्के नतीजे, डर या इलाज के रूप में नहीं बेचना चाहिए। स्वास्थ्य, कानूनी या पैसे की समस्या में सही professional help लेना ज़रूरी है।
रत्न किसी ग्रह को मजबूत करने के लिए बताया जाता है। इसलिए रिपोर्ट में कारण होना चाहिए कि उस ग्रह को मजबूत करना आपके लिए सही क्यों है और किन हालात में रत्न नहीं पहनना चाहिए। Gem laboratory रत्न असली है या कृत्रिम और उस पर treatment हुआ है या नहीं, यह जाँच सकती है।
अच्छी रिपोर्ट डर नहीं बढ़ाती। वह नियम, अपवाद और पूरा संदर्भ आसान भाषा में समझाती है।
रिपोर्ट में केवल label दिया हो तो
पूछें कि कौन-से ग्रह और भाव देखकर नतीजा निकाला गया, कौन-सा भंग देखा गया और किस दशा में यह बात ज़्यादा महत्वपूर्ण होगी। यह पुरानी रिपोर्ट का स्पष्टीकरण है। इसी बात को किसी नए शादी, नौकरी या निवेश के सवाल पर लागू करना नया विश्लेषण हो सकता है।
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